मनुष्य ऋषि-मुनियों के द्वारा बतलाई हुई पद्धतियों से उदर आदि स्थानों में जिन का चिंतन करते हैं और जो प्रभु उनके चिंतन करने पर मृत्यु भय का नाश कर देते हैं उन ह्रदयदेश में विराजमान प्रभु कि हम उपासना करते हैं।
3/18१८-हिरण्याक्षके साथ वराहभगवान्का युद्ध
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CHAPTER EIGHTEEN: The Battle Between Lord Boar and the Demon Hiraṇyākṣa
1.१६-जय-विजयका वैकुण्ठसे पतन १७-हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्षका जन्म तथा हिरण्याक्षकी दिग्विजय १८-हिरण्याक्षके साथ वराहभगवान्का युद्ध १९-हिरण्याक्ष-वध २०-ब्रह्माजीकी रची हुई अनेक प्रकारकी सृष्टिका वर्णन २१-कर्दमजीकी तपस्या और भगवान्का वरदान २२-देवहूतिके साथ कर्दम प्रजापतिका विवाह २३-कर्दम और देवहूतिका विहार
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